Role Of Youth In Nation Building Essay In Hindi

Role Of Students in Nation Building

The future of India depends on our students. a country’s name and fame rest on the youth. If the power of young men or students is directed to constructive purposes, the whole nation will move to all round development. This responsibility has increased immensely with the dawn of independence. An eminent educationist has rightly said, “Give me the children and I will change the nation.”     A nation can make progress only when it gets the co- operation form all its citizens. So it is essential that students must know about their duties.

India is a developing country. The young men may do  a lot in the development work. They may go to the villages for adult education, for doing social service to the poor villagers, for teaching new technology in farming and other such vocations. The trained and learned young men may bring about green revolution in the country. They may preach ideas of secularism in the country. By leading an ideal simple life they may lead literate. In emergencies, they may do a lot in controlling floods etc. we can mobilize student power to preach communal harmony. In brief, the student power may be used at every moment whenever the nation needs their services.

To play their role properly in modern India we should teach the youth of our country to make themselves disciplined.  They should not be led away by the anti- national forces. They should  not go astray in their schools and colleges. In all, the teachers and professor may fill the students’ hearts with idealism. The youngmen should learn lessons of hard work, high morality, books as may create such ideals. Mahatma Gandhi and Pandit Jawahar Lal Nehru lived simple life. They fought and brought freedom to the country. They believed in ideal life of a true patriot. Let us (the students), learn lessons of patriotism and sacrifice from the life of Netaji Subhash Chandra Bose, Shri Lal Bahadur Shastri and Rafi Ahmed Kidwai. The students should live for  the nation and follow the road paved by our beloved Nation builder, Sardar Vallabh Bhai Patel.

The educational institutions should frame courses and   syllabi conforming to these ideals. Mere preaching and teaching in incomplete and insufficient. The teaching must have some objective. The teaching should make the students enable to shoulder the responsibility of national reconstruction. By inspiring high ideals among the masses the students can make the nation great.     

The first duty of students is toward themselves. They should keep their bodies healthy and active. They should improve their healthy from the  very beginning. A sound body has a sound mind. To keep themselves strong, they should take a keen interest in games and sports and different forms of physical exercises. A weak student can do nothing. He is unable to do anything for the good of his country or to himself. Students should give to bad habits like smoking, gambling and aimless wandering. These bad habits affect their health directly or indirectly.

The students must understand that they are students and should pay full attention  to their studies. They should devote a greater part of their time to the pursuit of knowledge and  wisdom. They should play for them to learn and to prepare themselves for future responsibilities in life. Without good education they will not be able to shoulder their future burdens. 

Knowledge without character is wickedness. Students should cultivate in them good manners and purity of life. They should not follow only intellectual knowledge , but also from their moral character. Obedience to parents, respect for teachers, sympathy for the poor, love for all and malice towards none should be their chief moral ideals. They should be refined in their taste, sweet in their speech and polite in their behavior.

In short, the duty of students is to prepare for future responsibility. He is to remove the evils such as child marriage, gambling, drinking, smoking, litigation, superstition, untouchability, illiteracy, adulteration, corruption and dowry system, from the society. They should create in them a spirit of social service. Students are the future rulers and leaders of our country. They are the reserve force of our country. They are the backbone of the country. The future of India depends on our students.

March 28, 2017evirtualguru_ajaygourEnglish (Sr. Secondary), LanguagesNo CommentEnglish 10, English 12, English Essay Class 10 & 12, English Essay Graduation

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भारतीय युवा और जिम्मेदारी पर लेख | Indian youth and responsibility Article  in hindi

भारत देश की रीढ़ की हड्डी युवा वर्ग को कहा जाता है. देश को बनाने के लिए युवा वर्ग मुख्य भूमिका निभाता है. किसी भी देश का भविष्य देश के युवाओं के द्वारा सुंदर बनता है. हमारा भारत देश तो युवाओं का ही देश है, हमारे देश की जनसँख्या का एक बड़ा हिस्सा युवा वर्ग का है. युवा उनको कहा जाता है जिनकी उम्र 15 साल से 40 साल के बीच हो. भारत देश को आजादी दिलाने में मुख्य भूमिका निभाने वाले  भगत सिंह, सुभाष चन्द्र बोस, चंद्रशेखर आजाद, खुदीराम बोस थे. इसके अलावा भी बहुत से स्वतंत्रता संग्रामी थे, जिन्होंने देश के नाम अपनी जान दे दी. भारतीय युवा ने देश को कहाँ से कहाँ पहुँचा दिया है, युवाओं के चलते ही देश ने इतनी तेजी से विकास किया है. लेकिन आज का भारतीय  युवा स्वार्थी हो गया है, वो देश की तरक्की के बारे में न सोच कर सिर्फ अपने बारे में सोचता है. भारतीय युवा को अपनी ज़िम्मेदारी को समझना चाहिए.

भारतीय युवा और जिम्मेदारी पर लेख 

Indian youth and responsibility in hindi

अब समय आ गया है कि देश के युवा को अपनी ज़िम्मेदारी समझनी होगी. विकासशील से विकसित देश बनने के लिए उसे सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, प्रशासनिक सभी विषयों में रूचि लेना  होगा. एक मजबूत राष्ट्र विकास के लिए युवाओं में एक फौलादी जिगर, दृढ़ इच्छा शक्ति, पराक्रम, धैर्य, संयम की जबरजस्त मांग होती है. स्वामी विवेकानंदने कहा था कि ‘युवा राष्ट्र की वास्तविक शक्ति है’. स्वामी विवेकानंद ने देश के युवा को हमेशा से बढ़ावा दिया, उनके विचार आज भी युवाओं के मन को प्रभावित करते है, यही कारण है कि विवेकानंद को कई लोग अपना आदर्श मानते है. मॉडर्न भारत बनाने के लिए ये 3 बातों पर ध्यान देना बहुत जरुरी है –

युवाओं की ज़िम्मेदारी (Youth Responsibility)–

  1. देश के प्रति ज़िम्मेदारी – देश में बदलाव के लिए देश के युवा को देश से प्रेम रखना होगा. देश प्रेम के चलते ही युवा देश की तरक्की के बारे में सोच पायेगा. देश प्रेम दिखाने के लिए युवा को राजनीती में रूचि दिखानी होगी. आज देश की बागडौर वृद्ध लोगों के हाथ में है, कुछ एकाद ही युवा राजनीती में सक्रीय है. जिससे राजनीती बत से बत्तर होती जा रही है. ये बूढ़े नेता अपनी देखभाल तो सही से कर नहीं पाते है, देश की सेवा कैसे करेंगें. देश में युवाओं को देश का एक अच्छा नागरिक भी बनना चाहिए, देश के प्रति ज़िम्मेदारी जैसे वोट डालना, देश को स्वच्छ रखना, टैक्स भरना, घूस न लेना न देना आदि को समझना चाहिए. एक अच्छा नागरिक वही है, जो खुद भी ज़िम्मेदार बने, और दुसरे को भी इसके लिए प्रेरित करे.

युवाओं का राजनीती के प्रति आक्रोश के कारण –

  • राजनीती में ऐसे बहुत से चेहरे है, जो राजनीती को मलिन कर रहे है. राजनैतिज्ञ में लालच, भ्रष्टाचार, सत्ता के लिए कुछ कर बैठना ये सभी आदत दिखाई देती है, जिससे युवाओं को राजनीती से घृणा होती जा रही है.
  • देश में फैली अनेकों बुराइयों से दूर युवा दुसरे देश में रहना पसंद करते है, उन्हें दुसरे देश में विकास के ज्यादा मौके समझ आते है.
  • दुसरे देश वाले भारत के युवाओं को अधिक पैसा देकर वही रहने का मौका देते है, क्यूंकि विदेशी भी मानते है, भारतीय युवा ज्यादा मेहनती होते है.
  • अगर कोई युवा राजनीती में जाता भी है, तो सच्चे मार्ग में चलते हुए उसे सत्ताधारीयों के द्वारा दबा दिया जाता है.
  • मीडिया कई बार राजनीती का गलत चेहरा सबके सामने लाती है, जिससे युवा देश की राजनीती को दूर से ही गलत समझ लेता है.
  • देश में युवा आवाज को अनुभव की कमी बताकर हमेशा दबाया जाता है.
  • माता पिता नहीं चाहते उनका बेटा राजनीती में आकर अपना भविष्य ख़राब करे, क्यूंकि माना जाता है कि जो कम पढ़ा, लिखा होता है, या जिसको पढाई या काम में कोई रूचि नहीं होती है, वही राजनीती में आता है.
  • माँ बाप भारत देश की राजनीती को देखकर, अपने बच्चे को राजनीती में भेजने से डरते है.

देश के युवा जो राजनीती में शौक रखते है, वे दूर से बैठकर बस तमाशा देखकर, दूसरों की गलती निकालते है, उसे जाकर ठीक करने से डरते है. लेकिन कहते है कि कीचड़ को साफ़ करने के लिए कीचड में उतरना बहुत जरुरी है. उस कीचड से आपके उपर भी दाग लगेंगें, लेकिन वे अपनी छाप नहीं छोड़ पायेंगें.

युवा आज घर बैठे सोशल मीडिया के द्वारा अपनी आवाज तो बुलंद करने लगा है, ये एक अच्छा भी तरीका है, लेकिन इसके अलावा उसे राजनीती में भी अपना नाम लिखवाना होगा. वैसे आजकल के  चुप बैठने वालों में से नहीं है, कोई भी गलत बात होते ही, उसके बारे में सोशल मीडिया में ट्रेंडिंग चालू हो जाती है. लोग अपने अलग अलग विचार उस पर प्रकट करते है. किसी चीज को सपोर्ट करने के लिए सोशल मीडिया में आवाज उठाई जाती है. लेकिन ये बात भी सच है कि ये आवाज कई बार हमारे देश के ऊँचे स्थान पर बैठे नेताओं के कान तक नहीं पहुँचती है. सोशल मीडिया का माध्यम आज भी पूरी तरह से विश्वास करने योग्य नहीं है.

देश के युवा का राजनीती में आने से फायदा –

1.विकसित,सशक्त देश बनेगा
2.बेरोजगारी, आरक्षण की समस्या हल होगी
3.शिक्षा में वृद्धि होगी
4.आने वाला कल देश के लिए बहुत अच्छा होगा
  • युवाओं में ज्यादा जोश व एनर्जी होती है, जिससे वे अधिक लगन के साथ काम कर पायेंगें.
  • युवाओं की सोच एक नयी, विकास वाली होती है, जिससे देश का विकास होना तय है.
  • नए मॉडर्न इंडिया बनाने के लिए, युवा सोच की बहुत जरूरत है. युवा अपने युवा भाई बहनों के लिए सोचेगा जिससे बहुत सी परेशानियाँ हल हो जाएँगी.
  1. परिवार के प्रति ज़िम्मेदारी –
  • आज कई युवा भटक गया है, कई बार सेल्फिश हो जाता है. कुछ लोग बस अपने में ही मस्त रहते है, माँ बाप परिवार के प्रति ज़िम्मेदारी समझते ही नहीं है. युवा ही है, जो परिवार के खम्बे होते है, जो उसे खड़ा करते है. वे जिम्मेदार नहीं होंगें तो परिवार भी बिखर जायेगा और जब तक परिवार विकास नहीं करेगा, देश कभी विकास नहीं कर पायेगा.
  • कुछ ऐसे भी युवा है, जो बस काम को ही तवज्जो देते है, परिवार को नहीं. माँ बाप के प्रति ज़िम्मेदारी नहीं समझते और उन्हें वृधाश्रम में छोड़ देते है. माँ बाप के प्रति ज़िम्मेदारी से कभी नहीं भागना चाहिए. काम के अलावा पुरे परिवार के साथ समय बिताना चाहिए.
  1. समाज के प्रति ज़िम्मेदारी – युवाओं को सामाजिक भी होना चाहिए. समाज हमारे लिए बनाया गया है, समाज की गतिविधियों में भाग लेना चाहिए. समाज के प्रति अपनी ज़िम्मेदारी को समझना चाहिए. लेकिन कभी भी समाज की बातों में आकर गलत निर्णय नहीं लेना चाहिए. लोग क्या कहेंगें, समाज क्या कहेगा यही सोच सोचकर कई बार इन्सान गलत निर्णय ले लेता है, जिससे नुकसान समाज का नहीं, आपका ही होता है.

युवा अपनी ज़िम्मेदारी समझेंगें तभी वे आगे भविष्य में अपने बच्चों को इसके बारे में बता सकेंगें. युवा शक्ति देश की सबसे बड़ी शक्ति है, आज हमारे देश का अधिकतर युवा वर्ग पढ़ा लिखा, इस बात का फायदा देश को भी मिलना चाहिए और देश को आगे बढ़ाने के लिए युवा को खुलकर सामने आना चाहिए. हमारे देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी युवा शक्ति को सबसे बड़ा मानते है, वो युवाओं से देश की राजनीती में आने के लिए प्रेरित भी करते है.

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Vibhuti

विभूति दीपावली वेबसाइट की एक अच्छी लेखिका है| जिनकी विशेष रूचि मनोरंजन, सेहत और सुन्दरता के बारे मे लिखने मे है| परन्तु साईट के लिए वे सभी विषयों मे लिखती है|

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